'रवीन्द्र कालिया' की कहानियों में चित्रित उच्च वर्गीय समाज

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विनोद बाबुराव मेघशाम
शक्तिकुमार द्विवेदी

Abstract

अपने समय के समाज को रवीन्द्र कालिया ने बडी ही गहराई के साथ अपने कथा साहित्य में चित्रित किया है। युग विशेष की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक परिस्थिति में समाज के उच्च वर्ग, मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग किस तरह एक दुसरे के प्रति व्यवहार कर रहा था उसका भी चित्रण किया है। समय परिवर्तनशील है। युगीन परिस्थितियाँ हमेशा एक सी नहीं रहती। युग बदलने के साथ-साथ किसी समाज विशेष की परिस्थितियाँ भी बदल जाती है। इसलिए जिस रचनाकार के पास संवेदनाओं को गहराई से समझने और उसे विश्लेषित करने की समझ नहीं होगी, उसका साहित्य कभी भी कालजयी नहीं हो सकता। रवीन्द्र कालिया अपने कहानियों में उच्च वर्गीय समाज के लोगों कि जीवन शैली के साथ ही उनका ऐश्वर्यपूर्ण जीवन उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा एवं आस्तित्व का परिचय कराते है। उच्च वर्ग किस तरह समाज के अन्य लोगों के साथ दुराव रखता है, उसके साथ समाज में प्रतिष्ठा रखने के लिए किस तरह संघर्ष करता है। और गरीबों के प्रति सहानुभूति दिखाकर अपने सुविधानुसार स्वार्थ के लिए उनका उपयोग करने की प्रवृति को दिखाया गया है, आदि का अपने कहानियों में चित्रित किया है।

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Research Articles

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विनोद बाबुराव मेघशाम

शोधार्थी-उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद.

शक्तिकुमार द्विवेदी

प्राध्यापक-उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद

References

रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ, 'बुढवा मंगल', रवीन्द्र कालिया, वाणी प्रकाशन दिल्ली-2008 पृ.सं-375

मेरी प्रिय कहानियाँ, रवीन्द्र कालिया, 'चाल' कहानी राजपाल प्रकाशन, नयी दिल्ली-2017 पृ.सं-105

मेरी प्रिय कहानियाँ, 'चाल' कहानी रवीन्द्र कालिया, राजपाल प्रकाशन, नयी दिल्ली-2017 पृ.सं-107

रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ, 'गरीबी हटाओ', रवीन्द्र कालिया, वाणी प्रकाशन दिल्ली-2008 पृ.सं-266

रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ, 'दादा दुबे', रवीन्द्र कालिया, वाणी प्रकाशन दिल्ली-2008 पृ.सं-350

रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ, 'सन्दल और सिन्थाल', रवीन्द्र कालिया, वाणी प्रकाशन दिल्ली-2008 पृ.सं-79

रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ, 'टाट के किवाडों वाले घर', रवीन्द्र कालिया, वाणी प्रकाशन दिल्ली-2008 पृ.सं-310