हिंदी साहित्यकारों का समाज के लिए योगदान

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तेजस्विनी शिवसिंग रजपूत

Abstract

शोध सार हिंदी साहित्यकारों द्वारा समाज को दिया गया योगदान भारतीय सांस्कृतिक चेतना और नैतिक पुनर्जागरण का दिशासूचक रहा है। हिंदी साहित्य केवल मनोरंजन या भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन, जनजागरण और नैतिक उत्थान का सशक्त उपकरण रहा है। आदिकाल से आधुनिक काल तक हिंदी साहित्य ने समाज के विविध पक्षों-राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक-पर गहरा प्रभाव डाला है। तुलसी, कबीर, बिहारी, रही‍म और चंदबरदाई जैसे कवियों ने अपने रचनात्मक लेखन द्वारा समाज में नैतिकता, कर्तव्य, देशभक्ति और मानवता के मूल्यों को स्थापित किया।

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Research Articles

Author Biography

तेजस्विनी शिवसिंग रजपूत

शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर.

How to Cite

तेजस्विनी शिवसिंग रजपूत. (2026). हिंदी साहित्यकारों का समाज के लिए योगदान. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 12(01), 143 to 146. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/328

References

बिहारी सतसई – सुबोध काव्यमाला, संपादक: आचार्य श्री रामलोचन शरण, पुस्तक भंडार पटना।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली, कक्षा नवमी की पाठ्यपुस्तक।

कबीर बीजक, संपादक – हजारी प्रसाद द्विवेदी, राजकमल प्रकाशन, 2005।