मध्यकालीन भक्ति काल में हिन्दी ज्ञान परंपरा के विविध आयाम
Main Article Content
Abstract
भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा और मध्यकालीन साहित्य इन दोनों के मध्य घनिष्ठ संबंध रहा है। ये दोनों ही भारतीय संस्कृति और हमारे इतिहास की एक बेजोड़ कड़ी रहा है। मध्यकालीन साहित्य के भक्ति काल ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पक्षों को बेहतरीन तरीके से दीप्तिमान किया है। जहाँ भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक उपनिषद और बौद्ध काल में प्रखर हुए, वहीं मध्यकालीन साहित्य ने इस ज्ञान को भाषा और भक्ति से जोड़ा। वेदों की गहनता, उपनिषदों की गूढ़ता तथा पुराणों की सांस्कृतिक गौरव जब मध्यकालीन कवियों के मुख में मुखरित हुआ तो भक्तिकाल प्रेम, भक्ति और ज्ञान का जीत जाता निगम बन गया। निर्गुण व सगुण भक्ति के माध्यम से भक्ति का एक विस्तृत रूप देखने को मिलता है, जो हमें हिंदी ज्ञान परंपरा से जोड़ता है। जहाँ कबीर जो निर्गुण भक्ति के उपासक हैं, उनके दोहों से आत्मज्ञान की चमक देखने को मिलती है, वहीं सगुण उपासक तुलसी की चौपाइयों में धर्म और नीति का समर्पण भाव झलकता है। मीरा के भजन प्रेम और अनन्या भक्ति की छाप छोड़ते हैं, वहीं सूर के पदों की भक्ति, मधुर रसधार बनकर बहती है। मध्यकालीन साहित्य के भक्तिकालीन काव्यधारा ने भारत के ज्ञान का केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रखकर ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए अनेक भाषाओं में उतारा, जिससे समाज में धार्मिकता, प्रेम, समभाव, आध्यात्मिकता और नैतिकता का सूर्योदय हुआ। इस शोध पत्र में मध्यकालीन भक्ति काव्यधारा में भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है जिसमें निर्गुण भक्ति, सगुण भक्ति, कबीर दास, तुलसी कृत रामभक्ति व सूर और मीरा कृत कृष्णभक्ति, नीति ज्ञान, प्रेम मार्ग, आत्मसमर्पण आदि की समीक्षा की गई है।
Article Details
Section

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
References
कबीर ग्रंथावली, राम किशोर शर्मा, लोक भारती प्रकाशन, संस्करण 2018, पृष्ठ सं- 228
साहित्य वैभव_मध्यकालीन पद्य_कबीर के दोहे_ पृष्ठ सं- 99
भक्ति काव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा_डॉ. धर्मेन्द्र कुमार शर्मा, पृष्ठ सं- 1
भक्ति काव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा_डॉ. धर्मेन्द्र कुमार शर्मा, पृष्ठ सं- 1
http://m.bharatdiscovery.org/india/सूरदास_की_भक्ति_भावना_date-22/5/2025_time-8:40am
काव्य संगम, सं-प्रो. शेखर, प्रकाशन-प्रासारंग, सूर पदावली, पृष्ठ सं- 9
मीरा- पदावली, सं- श्रीमती विष्णुकुमारी, श्रीवास्तव (मंजु), प्रकाशक- हिन्दी भवन, दूसरा संस्करण, पृष्ठ सं- 69,21
वहीं पृष्ठ सं- 28
वहीं पृष्ठ सं- 63
वहीं पृष्ठ सं- 61