भगवान दास मोरवाल जी के उपन्यासों में लोक परम्परा और आधुनिक यथार्थ

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लीना पटनायक

Abstract

समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में भगवान दास मोरवाल के उपन्यास लोक परंपरा और आधुनिक यथार्थ के द्वन्द्वात्मक संबंधों को रेखांकित करते हैं। मेवात क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित इन कृतियों में ग्रामीण जीवन, पितृसत्तात्मक ढाँचे और बाज़ारवादी शक्तियों के बीच पिसते आम आदमी की व्यथा का मार्मिक चित्रण मिलता है। यहाँ लोक-संस्कृति, भाषा और रीति-रिवाज केवल परिवेश निर्माण नहीं करते, बल्कि वैश्वीकरण और राजनीतिक भ्रष्टाचार के दौर में अस्मिता और प्रतिरोध का स्वर बन जाते हैं। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि मोरवाल के साहित्य में परंपरा और आधुनिकता के बीच एक निरंतर संवाद और संघर्ष विद्यमान है, जो समाज की विडंबनाओं को उजागर करता है।

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Research Articles

Author Biography

लीना पटनायक

शोधार्थी, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई.

How to Cite

लीना पटनायक. (2026). भगवान दास मोरवाल जी के उपन्यासों में लोक परम्परा और आधुनिक यथार्थ. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 12(05), 218 to 226. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/460

References

मोरवाल, भगवान दास – काला पहाड़

मोरवाल, भगवान दास – शकुंतिका

मोरवाल, भगवान दास – रेत

प्रेमचंद - उपन्यास कला

नामवर सिंह - कहानी और यथार्थ

रामविलास शर्मा – लोक संस्कृति और हिंदी साहित्य