'सीता पुनि बोली' में स्त्री प्रतिरोध के स्वर

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सुप्रिया पी

Abstract

मृदुला सिन्हा द्वारा रचित उपन्यास 'सीता पुनि बोली' पौराणिक नारी चरित्र सीता को आधुनिक नारी चेतना और प्रतिरोध के स्वर के रूप में पुन: व्याख्यायित करता है। पारंपरिक अबला नारी की छवि को तोड़ते हुए, यह रचना सीता को एक स्वाभिमानी, तर्कशील और शक्ति-संपन्न व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती है। वनवास, अग्निपरीक्षा और परित्याग जैसी विषम परिस्थितियों में भी सीता का आत्मबल और उनका एकाकी मातृत्व संघर्ष यहाँ प्रमुखता से उभरा है। पितृसत्तात्मक समाज के निर्णयों पर प्रश्नचिह्न लगाती हुई सीता, आधुनिक भारतीय नारी के लिए स्वाभिमान और सशक्तिकरण की एक नई प्रेरणा बनकर सामने आती हैं।

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Research Articles

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सुप्रिया पी

सहायक आचार्य, हिंदी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग, केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय

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मृदुला सिन्हा, सीता पुनि बोली, विद्या विहार, नई दिल्ली, 2016