कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मानव जीवन पर प्रभाव

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प्राची त्रिपाठी

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज दुनिया के सबसे चर्चित विषयों में से एक है और अधिकांश लोगों को मानव बुद्धि और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अंतर और समानता के बारे में स्पष्टता नहीं है। ऐसे में सबसे पहले सवाल उठता है कि क्या यह मानव जाति का भविष्य है? या क्या मनुष्य और मशीन वास्तव में एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा में हैं? कुछ शोधकर्ताओं और दार्शनिकों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव की क्षमता वृद्धि के रूप में होगी, जिससे प्रौद्योगिकी में सुधार तथा मानव जाति की प्रगति की नई कहानी लिखी जाएगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता 21वीं सदी की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है। यह तकनीक मानव बुद्धि की नकल करते हुए सीखने, तर्क करने, निर्णय लेने और समस्याओं को हल करने की क्षमता प्रदान करती है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि, प्रशासन, संचार और मनोरंजन जैसे अनेक क्षेत्रों में हो रहा है। मानव जीवन पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण करते हुए, भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है।

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प्राची त्रिपाठी

असिस्टेंट प्रोफेसर, सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कोरमंगला, बंगलुरु.

References

https://www.helsinki.fi/en/news/human-centric-technology/ artificial-intelligence-changing-society-brain-and-humanity

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