भाषा, साहित्य और संस्कृति में उभरती प्रवृत्तियाँ: सिनेमा, नाटक और जनसंस्कृति का अध्ययन

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प्राची त्रिपाठी
हिना शर्मा

Abstract

भाषा, साहित्य और संस्कृति के अंतर्संबंधों के परिप्रेक्ष्य में सिनेमा, नाटक और जनसंस्कृति की भूमिका का गहन अध्ययन करता है। यह शोध रेखांकित करता है कि कैसे दृश्य-श्रव्य माध्यम न केवल सामाजिक यथार्थ को प्रतिबिंबित करते हैं, बल्कि जनसंस्कृति, जीवनशैली और भाषाई प्रयोगों को भी नई दिशा देते हैं। अध्ययन में भारतीय सिनेमा और रंगमंच के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक सरोकारों के चित्रण और डिजिटल युग (OTT) में उभरती प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षतः, यह पत्र स्पष्ट करता है कि सिनेमा और नाटक सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक हैं, जो भाषा और साहित्य को निरंतर समृद्ध कर रहे हैं।


 

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Research Articles

Author Biographies

प्राची त्रिपाठी

असिस्टेंट प्रोफेसर, सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कोरमंगला. 

हिना शर्मा

बीडीए अंतिम वर्ष, सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कोरमंगला.

How to Cite

प्राची त्रिपाठी, & हिना शर्मा. (2026). भाषा, साहित्य और संस्कृति में उभरती प्रवृत्तियाँ: सिनेमा, नाटक और जनसंस्कृति का अध्ययन. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 12(03), 252 to 257. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/432

References

Researchgate

Journal of Communication and Management

Indian cinema and pop culture, सौमी मेरी (2016), Vol 2

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