भाषा, साहित्य और संस्कृति में उभरती प्रवृत्तियाँ: सिनेमा, नाटक और जनसंस्कृति का अध्ययन
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भाषा, साहित्य और संस्कृति के अंतर्संबंधों के परिप्रेक्ष्य में सिनेमा, नाटक और जनसंस्कृति की भूमिका का गहन अध्ययन करता है। यह शोध रेखांकित करता है कि कैसे दृश्य-श्रव्य माध्यम न केवल सामाजिक यथार्थ को प्रतिबिंबित करते हैं, बल्कि जनसंस्कृति, जीवनशैली और भाषाई प्रयोगों को भी नई दिशा देते हैं। अध्ययन में भारतीय सिनेमा और रंगमंच के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक सरोकारों के चित्रण और डिजिटल युग (OTT) में उभरती प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षतः, यह पत्र स्पष्ट करता है कि सिनेमा और नाटक सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक हैं, जो भाषा और साहित्य को निरंतर समृद्ध कर रहे हैं।
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References
Researchgate
Journal of Communication and Management
Indian cinema and pop culture, सौमी मेरी (2016), Vol 2