राष्ट्रीय एकता और हिंदी
Main Article Content
Abstract
यह लेख भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता के भीतर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में हिंदी भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका का अन्वेषण करता है। यह स्वतंत्रता संग्राम में जन-जागरण के माध्यम के रूप में हिंदी के ऐतिहासिक योगदान और प्रशासन तथा नागरिकों के बीच की दूरी को पाटने के लिए राजभाषा के रूप में इसके विकास का परीक्षण करता है। अध्ययन विभिन्न समुदायों को जोड़ने वाली संपर्क भाषा के रूप में हिंदी के कार्य को उजागर करता है, जो भावनात्मक और सांस्कृतिक एकीकरण को मजबूत करती है। इसके अतिरिक्त, यह आधुनिक डिजिटल युग में हिंदी की प्रासंगिकता पर चर्चा करता है और जोर देता है कि आपसी सम्मान और समन्वय के माध्यम से हिंदी को अपनाना राष्ट्रीय अखंडता के लिए अनिवार्य है।
Article Details
Section

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
References
People of India Project, Language & Script Volume-9, 1993, New Delhi, India.
रामविलास शर्मा – भारत की भाषा समस्या, पृ. 6, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 1978.
केशवचन्द्र माहेश्वरी (संपा.), डॉ. रामविलास शर्मा: भारतीय भाषाएँ और हिंदी, पृ. 156-157.
नागरी प्रचारिणी पत्रिका, जनवरी 2009, अंक-1, पृ. 66, वाराणसी.
देवेन्द्र नाथ शर्मा – राष्ट्रभाषा हिंदी समस्याएँ एवं समाधान, पृ. 16, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 1987.
Indian Readership Survey (IRS) 2012 Q1, by Media Research Users Council, Mumbai.