भावनाशील उपेक्षित भारतीय नारी : सलमा
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मोहन राकेश के प्रसिद्ध नाटक &पैर तले की ज़मीन* में सलमा का चरित्र एक हताश, उपेक्षित और भावनाशील भारतीय नारी का सशक्त प्रतिनिधित्व करता है। अपने पति अयूब के निरंतर ताने, उपेक्षा और दुर्व्यवहार के बावजूद वह एक पारंपरिक और सहनशील पत्नी की तरह अपने कर्तव्यों का निर्वाह करती है। अयूब का चारित्रिक पतन और सलमा के विवाह-पूर्व प्रेम को लेकर उसका संशय उनके वैवाहिक जीवन को एक &कब्रिस्तान* में बदल देता है। इसमें सलमा के मानसिक द्वंद्व, उसकी असीम सहनशीलता, पति-धर्म और अंततः एक उपेक्षित स्त्री के रूप में उसकी मार्मिक व विवश स्थिति का मनोवैज्ञानिक और यथार्थपरक विश्लेषण किया गया है।
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References
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 63
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 41
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 68
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 110
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 73
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 45
तिलकराज शर्मा, अपने नाटकों के दायरे में, मोहन राकेश, पृ. सं. 142
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 101
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 88
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 86
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 78
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 44
मोहन राकेश, पैर तले की ज़मीन, पृ. सं. 85