आदिवासी साहित्य में ‘स्त्री प्रश्न’- एक अध्ययन

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डॉ. शीला भास्कर

Abstract

आदिवासी साहित्य भारतीय साहित्य की एक विशिष्ट और सशक्त धारा है, जो आदिवासी समुदायों के जीवन, संघर्ष, संस्कृति और अस्तित्व को अभिव्यक्त करता है। इस साहित्य में &स्त्री प्रश्न* एक महत्वपूर्ण विमर्श के रूप में उभरकर सामने आया है। स्त्री प्रश्न का तात्पर्य केवल महिलाओं की स्थिति से नहीं है बल्कि उनके अधिकारों, अस्मिता, श्रम, शोषण, संघर्ष और सशक्तिकरण से भी है।


आदिवासी समाज को अक्सर मुख्यधारा समाज की तुलना में अधिक समानतावादी माना जाता है लेकिन वास्तविकता इससे अधिक जटिल है। आदिवासी स्त्रियाँ एक ओर अपेक्षाकृत स्वतंत्रता का अनुभव करती हैं वही दूसरी ओर वे कई प्रकार के सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक शोषण का सामना भी करती हैं। आदिवासी साहित्य इन विरोधाभासों को गहराई से उजागर करता है।

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Author Biography

डॉ. शीला भास्कर

असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, एस.एस.एन.सी. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर कॉलेज, हुब्बल्ली.

How to Cite

शीला भास्कर. (2026). आदिवासी साहित्य में ‘स्त्री प्रश्न’- एक अध्ययन. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 15(03), 139 to 143. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/2048

References

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सं कविता कृष्णन, जुलियन विगो, रणेंद्र सविता सिंह : हमें चाहिए बेखौफ आजादी। प्रकाशक - सांस्कृतिक संकुल जन संस्कृति मंच, बैक कवर पेज।

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