बुंदेलखंड के बेडिया समुदाय में ‘राई’ नृत्य: सांस्कृतिक पहचान

Main Article Content

डॉ. श्रीकांत राठोड

Abstract

यह अध्ययन बुंदेलखंड के बेडिया आदिवासी समुदाय में प्रचलित &राई* नृत्य के सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक आयामों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। राई नृत्य बेडिनियों की सांस्कृतिक पहचान है और पारिवारिक अवसरों में इसे अनिवार्य माना जाता है। आलेख में नृत्य की प्रमुख मुद्राएँ, पहनावा और गीतों के प्रकारों पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही, यह अध्ययन यह भी बताता है कि आर्थिक जरूरत और सामाजिक संरचना के कारण, कई बेडिनियों को वेश्यावृत्ति जैसे कठोर विकल्प अपनाने पड़ते हैं। अन्य आदिवासी समुदायों में नृत्य और लोक कला की प्रथा के तुलनात्मक विश्लेषण के माध्यम से यह आलेख आदिवासी संस्कृति में नृत्य की भूमिका, स्त्री की विवशता और समाज की मानसिकता को समझने का प्रयास करता है।

Article Details

Section

Research Articles

Author Biography

डॉ. श्रीकांत राठोड

सहायक प्राध्यापक, श्री गु रा गांधी कला, श्री य अ पाटील वाणिज्य एवं श्री मा पु दोशी विज्ञान महाविद्यालय-इंडी, विजयपुर.

How to Cite

श्रीकांत राठोड. (2026). बुंदेलखंड के बेडिया समुदाय में ‘राई’ नृत्य: सांस्कृतिक पहचान. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 15(03), 133 to 138. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/2047

References

आदिवासी लड़की, आवाज़ ए मूलनिवासी, पृ.सं. 63

शरद सिंह, पिछले पन्ने की औरतें, पृ.सं. 255

शरद सिंह, पिछले पन्ने की औरतें, पृ.सं. 252-253

शरद सिंह, पिछले पन्ने की औरतें, पृ.सं. 253

शरद सिंह, पिछले पन्ने की औरतें, पृ.सं. 90

शरद सिंह, पिछले पन्ने की औरतें, पृ.सं. 256

शरद सिंह, पिछले पन्ने की औरतें, पृ.सं. 255

शरद सिंह, पिछले पन्ने की औरतें, पृ.सं. 255

शरद सिंह, पिछले पन्ने की औरतें, पृ.सं. 215

महुआ माजी, मरंग गोडा नीलकंठ हुआ, पृ.सं. 234

श्रीप्रकाश मिश्र, जहाँ बाँस फूलते हैं, पृ.सं. 111