उपेक्षित समुदाय की संस्कृति और पहचान

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डॉ. श्रीकांत बि. संगम

Abstract

उपेक्षित समुदायों (जैसे आदिवासी, दलित, घुमंतू) की संस्कृति और पहचान मुख्यधारा से भिन्न, प्रकृति-पूजन और सामूहिक परंपराओं पर आधारित है। ऐतिहासिक दमन और आर्थिक वंचना के बावजूद, इन्होंने अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक अस्मिता को बचाए रखा है। समाज के हाशिये पर स्थित इन असुरक्षित वर्गों〞जिनमें महिलाएं, बच्चे, प्रवासी श्रमिक और निःशक्तजन शामिल हैं〞को लगातार संरचनात्मक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। संसाधनों, शिक्षा और अवसरों के अभाव के बीच, अब इन समुदायों में डॉ. आंबेडकर और महात्मा फुले जैसे विचारकों से प्रेरणा लेकर सामाजिक समानता, न्याय और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शोषण के विरुद्ध एक सशक्त संघर्ष की भावना जागृत हुई है।

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Author Biography

डॉ. श्रीकांत बि. संगम

प्राध्यापक, मुख्यस्थ हिंदी विभाग, सी.एस.बि. कला, एस.एम.आर.पी. विज्ञान और जि.यल.आर. वाणिज्य महाविद्यालय, रामदुर्ग.

How to Cite

श्रीकांत बि. संगम. (2026). उपेक्षित समुदाय की संस्कृति और पहचान. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 15(03), 129 to 132. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/2046

References

उपेक्षित समाज की अवधारणा – प्रा. प्रशांत नारायण ढेपे

हिंदी कहानी और उपेक्षित समाज –डॉ. संजय एल. मादार

असुरक्षित हाशिये पर स्थित एवं उपेक्षित समूह समुदाय –दृष्टि पत्रिका 2026

उपेक्षित समुदायों का आत्म इतिहास –बद्री नारायण

आदिवासी साहित्य विमर्श –गंगा सहाय मीणा

उपेक्षित समुदायों का आत्म इतिहास –विष्णु महापात्र

उपेक्षित समुदाय और इतिहास लेखन -विमर्श