असग़र वजाहत के कहानी साहित्य में सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन
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असग़र वजाहत का कथा साहित्य समकालीन समाज की जटिलताओं, टूटते पारिवारिक रिश्तों और बदलती सांस्कृतिक संवेदनाओं का यथार्थपरक चित्रण करता है। उनकी कहानियों में जाति-धर्म के नाम पर फैले भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति अमानवीय क्रूरता (कन्या भ्रूण हत्या और दहेज प्रथा), तथा ग्रामीण भारत की त्रासदियों के बीच राजनीतिक संवेदनहीनता को गहराई से उकेरा गया है। इसके अतिरिक्त, आधुनिकता की अंधी दौड़ में दूषित होती नदियाँ, पश्चिमी संस्कृति का बढ़ता प्रभाव, शिक्षित बेरोजगारों की हताशा और कला-साहित्य के गिरते मूल्य भी उनके विमर्श के प्रमुख विषय हैं। यह रचना-संसार मानवीय संवेदनाओं का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ है, जो समाज को आत्मनिरीक्षण के लिए प्रेरित करता है।
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References
असग़र वजाहत -‘कत्लेआम का मेला’-पृ.सं-97-98
असग़र वजाहत - डेमोक्रेसिया -‘ड्रेन में रहनेवाली लड़कियाँ’– पृ. सं.18
असग़र वजाहत - डेमोक्रेसिया -‘ड्रेन में रहनेवाली लड़कियाँ’– पृ. सं.19
असग़र वजाहत - डेमोक्रेसिया -‘ड्रेन में रहनेवाली लड़कियाँ’– पृ. सं.21
असग़र वजाहत - भीड़तंत्र – फ़ैसला, - पृ. सं. 105.
पिचासी कहानियाँ, असग़र वजाहत,-‘मुख्य मंत्री और डेमोक्रेसिया’पृ. सं. 349.
पिचासी कहानियाँ, असग़र वजाहत, - ‘मुख्य मंत्री और डेमोक्रेसिया’– पृ. सं. 349.
असग़र वजाहत – मुक्ति – पृ. सं. 192
असग़र वजाहत–‘पिचासी कहानियाँ’– मुक्ति- पृ.सं.195-196.