हिंदी महिला नाट्य लेखन में उपेक्षित स्त्री समुदाय
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प्रस्तुत आलेख हिंदी महिला नाट्य लेखन के माध्यम से समाज के उन हाशिए पर स्थित स्त्री समुदायों की पड़ताल करता है, जिन्हें पितृसत्तात्मकइतिहास और साहित्य ने लंबे समय तक उपेक्षित रखा है। यह अध्ययन कुसुम कुमार, नादिरा जहीर बब्बर, त्रिपुरारी शर्मा और मीरा कांत जैसीनाटककारों की कृतियों का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करता है कि महिला लेखन केवल मध्यमवर्गीय समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें&सकुबाई जैसी घरेलू सहायिकाओं के अदृश्य श्रम और शिक्षा से वंचना के सवालों को प्रमुखता दी गई है। शोध यह रेखांकित करता है कि कैसे &सुनो शेफाली में दलित स्त्री की अस्मिता और आत्मसम्मान के स्वर मुखर हुए हैं। &लश्कर चौक में सांप्रदायिक पहचान के कारण &उनका धरम भरष्टहो गया है कहकर बहिष्कृत की गई स्त्रियों की त्रासदी को उकेरा गया है। इसके अतिरिक्त, यह कार्य &संस्कार को नमस्कार के माध्यम से नारीनिकेतन जैसे संस्थानों में किए जाने वाले यौन शोषण और &नेपथ्य राग जैसी कृतियों द्वारा विशाल पुरुष-प्रधान विद्वत समाज द्वारा मेधावी स्त्रियों की&जिह्वा काटने जैसे बौद्धिक दमन के ऐतिहासिक सच को उजागर करता है।
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References
बब्बर, नादिरा जहीर। सकुबाई, पृष्ठ 21
कुमार, कुसुम। सुनो शेफाली, पृष्ठ 339
कुमार, कुसुम। लश्कर चौक, पृष्ठ 441
कुमार, कुसुम। संस्कार को नमस्कार, पृष्ठ 219
कांत, मीरा। नेपथ्य राग, पृष्ठ 57
शर्मा, त्रिपुरारी। सन् सत्तावन का किस्सा: अज़ीजुन निसा, पृष्ठ 50
बब्बर, नादिरा जहीर। जी जैसी आपकी मर्जी, पृष्ठ 15
बब्बर, नादिरा जहीर। जी जैसी आपकी मर्जी, पृष्ठ 31
बब्बर, नादिरा जहीर। ऑपरेशन क्लाउडबर्स्ट, पृष्ठ 43