प्राचीन ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य (जैन, सिद्ध, नाथ, रासो साहित्य)
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यह आलेख भारतीय ज्ञान परंपरा में हिंदी साहित्य की प्रारंभिक भूमिका पर प्रकाश डालता है, विशेषकर जैन, सिद्ध, नाथ और रासो साहित्य के माध्यम से। जैन साहित्य ने अहिंसा और आत्मसंयम पर बल दिया, जबकि सिद्ध साहित्य ने तांत्रिक साधना और सामाजिक आडंबरों का विरोध किया। नाथ साहित्य ने योग, हठयोग, और गुरु महिमा को स्थापित किया, और रासो साहित्य ने वीरता तथा प्रेम गाथाओं को जनमानस तक पहुंचाया। इन धाराओं ने न केवल हिंदी भाषा को आकार दिया बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना को भी समृद्ध किया, जिससे आधुनिक हिंदी साहित्य की नींव पड़ी।
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References
डॉ. एस. के. शर्मा, हिंदी साहित्य, पृष्ठ सं. 11
Read - कबीर की उलटबांसियां - कबीर की उलटबांसियां - Version 2 - December
वही
वही
रोहित मांगलिक, हिंदी साहित्य का इतिहास, पृष्ठ सं. 23
S.R. Ramaswamy, A Passage Through India, page-122