प्राचीन ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य (जैन, सिद्ध, नाथ, रासो साहित्य)

Main Article Content

साहिल कुमार

Abstract

यह आलेख भारतीय ज्ञान परंपरा में हिंदी साहित्य की प्रारंभिक भूमिका पर प्रकाश डालता है, विशेषकर जैन, सिद्ध, नाथ और रासो साहित्य के माध्यम से। जैन साहित्य ने अहिंसा और आत्मसंयम पर बल दिया, जबकि सिद्ध साहित्य ने तांत्रिक साधना और सामाजिक आडंबरों का विरोध किया। नाथ साहित्य ने योग, हठयोग, और गुरु महिमा को स्थापित किया, और रासो साहित्य ने वीरता तथा प्रेम गाथाओं को जनमानस तक पहुंचाया। इन धाराओं ने न केवल हिंदी भाषा को आकार दिया बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना को भी समृद्ध किया, जिससे आधुनिक हिंदी साहित्य की नींव पड़ी।

Article Details

Section

Research Articles

Author Biography

साहिल कुमार

चतुर्थ सेमेस्टर बीबीए छात्र, गिब्स बिजनेस स्कूल, बंगलुरू.

How to Cite

साहिल कुमार. (2025). प्राचीन ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य (जैन, सिद्ध, नाथ, रासो साहित्य). ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 7(03), 265 to 271. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/1212

References

डॉ. एस. के. शर्मा, हिंदी साहित्य, पृष्ठ सं. 11

Read - कबीर की उलटबांसियां - कबीर की उलटबांसियां - Version 2 - December

वही

वही

रोहित मांगलिक, हिंदी साहित्य का इतिहास, पृष्ठ सं. 23

S.R. Ramaswamy, A Passage Through India, page-122