हिंदी प्रचार सोशल मीडिया के साथ: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

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नीना कृष्णन

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों द्वारा हिंदी भाषा के स्वरूप, संरचना और प्रयोग में आ रहे क्रांतिकारी बदलावों का विश्लेषण करता है। शोध का मुख्य केंद्र इस बात पर है कि कैसे फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों ने हिंदी की मानक वर्तनी को प्रभावित किया है। अध्ययन में ‘हिंग्लिश’ के उदय, व्याकरणिक नियमों की शिथिलता और संचार की नई शैलियों जैसे इमोजी और संक्षिप्तीकरण (Shortcuts) के प्रभाव की समीक्षा की गई है। निष्कर्षतः यह शोध भाषा की जीवंतता और उसकी शुद्धता के बीच के संघर्ष को रेखांकित करता है।

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Author Biography

नीना कृष्णन

एसोसिएट प्रोफ़ेसर,  जी आर वी बिजनेस मैनेजमेंट अकादमी,बेंगलुरू.

How to Cite

नीना कृष्णन. (2026). हिंदी प्रचार सोशल मीडिया के साथ: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 13(05), 87 to 91. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/613

References

जैसा कि तिवारी (2018) ने उल्लेख किया है, भाषा वही जीवित रहती है जो समय के साथ बदलती है। मिश्र (2021) ने रोमन लिपि के बढ़ते प्रभाव को देवनागरी के लिए चिंताजनक बताया है।

तिवारी, भोलानाथ (2018). भाषा विज्ञान. किताब महल, इलाहाबाद।

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