कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मानव जीवन पर प्रभाव

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जी. राधिका
डी.आर. लक्ष्मीकांत

Abstract

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक विज्ञान का वह शिखर है जिसने चिकित्सा, शिक्षा, व्यापार और दैनिक जीवन में कार्यक्षमता और सटीकता को नई परिभाषा दी है। यह तकनीक मशीनों को मानव-तुल्य सोचने और निर्णय लेने में सक्षम बनाती है, जिसका विस्तार ‘नैरो एआई’ से ‘जेनेरेटिव एआई’ तक हो चुका है। जहाँ एक ओर यह ‘प्रिसिजन मेडिसिन’ और ‘स्मार्ट एजुकेशन’ के माध्यम से क्रांतिकारी बदलाव ला रही है, वहीं दूसरी ओर रोजगार में कटौती, डेटा गोपनीयता और एल्गोरिद्मिक पक्षपात जैसी चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करती है। इसका भविष्य मानव और ए.आई. के संतुलित सहयोग और नैतिक उपयोग पर निर्भर है, ताकि यह तकनीक समग्र मानवीय विकास का सशक्त माध्यम बन सके।

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जी. राधिका

सहायक प्रोफेसर, एआईबीएम (AIBM), एआईटी (AIT) परिसर, ज्योतिनगर, चिक्कमगलुरु।

डी.आर. लक्ष्मीकांत

सहायक प्रोफेसर, एआईबीएम (AIBM), एआईटी (AIT) परिसर, ज्योतिनगर, चिक्कमगलुरु।

How to Cite

जी. राधिका, & डी.आर. लक्ष्मीकांत. (2026). कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मानव जीवन पर प्रभाव. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 13(05), 29 to 36. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/605

References

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Nature Journal: “AI in Healthcare” (विभिन्न शोध पत्र 2023-24)।

MIT Technology Review: “The Algorithm Accountability Act” - (ए.आई. के कानूनी और नैतिक पहलुओं पर)।