कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मानव जीवन पर प्रभाव: ज़िम्मेदारी, नैतिकता और मानवीय अस्तित्व का समकालीन विमर्श
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता समकालीन सभ्यता की एक युगांतकारी तकनीकी उपलब्धि है, जो मानव जीवन की निर्णय-प्रक्रिया और कार्य-संस्कृति को गहराई से पुनर्संरचित कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नैतिक उत्तरदायित्व के विघटन और मानवीय संवेदनाओं के मानकीकरण जैसी चुनौतियाँ भी उभरी हैं। तकनीक का उद्देश्य मानव श्रम को प्रतिस्थापित करना नहीं, अपितु क्षमता-विस्तार और कौशल-उन्नयन होना चाहिए। भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सार्थकता मशीन और मानवीय विवेक के संतुलित सहअस्तित्व में निहित है, जहाँ तकनीक साध्य नहीं, बल्कि मानव कल्याण का साधन मात्र रहे।
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