कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मानव जीवन पर प्रभाव: ज़िम्मेदारी, नैतिकता और मानवीय अस्तित्व का समकालीन विमर्श

Main Article Content

मंजुश्री मैनन

Abstract

कृत्रिम बुद्धिमत्ता समकालीन सभ्यता की एक युगांतकारी तकनीकी उपलब्धि है, जो मानव जीवन की निर्णय-प्रक्रिया और कार्य-संस्कृति को गहराई से पुनर्संरचित कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नैतिक उत्तरदायित्व के विघटन और मानवीय संवेदनाओं के मानकीकरण जैसी चुनौतियाँ भी उभरी हैं। तकनीक का उद्देश्य मानव श्रम को प्रतिस्थापित करना नहीं, अपितु क्षमता-विस्तार और कौशल-उन्नयन होना चाहिए। भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सार्थकता मशीन और मानवीय विवेक के संतुलित सहअस्तित्व में निहित है, जहाँ तकनीक साध्य नहीं, बल्कि मानव कल्याण का साधन मात्र रहे।

Article Details

Section

Research Articles

Author Biography

मंजुश्री मैनन

प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, एम.ई.एस कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, बैंगलोर.

 

References

बी. के. मातिलाल, Ethics and Epistemology, Oxford University Press, New Delhi, 2002, Pg. 73-76.

NITI Aayog, National Strategy for Artificial Intelligence, GOI, 2018, Pg. 41.

World Economic Forum, AI Governance, Geneva, 2020, Pg. 19.

नीति आयोग, भारत सरकार, National Strategy for Artificial Intelligence # AI for All, नई दिल्ली, 2018, Pg. 14-19.

Sen, Amartya, Development as Freedom, Oxford UP, 1999, Pg. 87.

शोशाना, जुबाफ, The Age of Surveillance Capitalism, पब्लिक अफेयर्स, न्यूयॉर्क, 2019, Pg. 215-230.

Twenge, Jean, iGen, Atria, 2017, Pg. 101.

Citron, Danielle, Hate Crimes in Cyberspace, Harvard UP, 2014, Pg. 92.

UNESCO, Digital Preservation of Languages, Paris, 2019, Pg. 22.