हिन्दी साहित्य में संत काव्य की सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना
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Abstract
हिन्दी साहित्य में संत काव्य का स्थान बहुमूल्य है। संत कवियों ने अपनी कविताओं के द्वारा भक्ति एवं आध्यात्मिक संदेश दिया और साथ ही साथ समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं का विरोध किया है। मध्यकालीन भारतीय समाज विभिन्न सामाजिक और धार्मिक विडंबनाओं से घिरा हुआ था। परिणामस्वरूप, संत काव्यधारा में प्रमुखता से सामाजिक रूढ़ियों, विसंगतियों और धार्मिक पाखंड जैसी समस्याओं पर प्रहार किया गया। संत साहित्य में संतों ने समानता का समर्थन किया है। संतों ने हमारी भारतीय संस्कृति को संरक्षित करके मानवीय मूल्यों को स्थापित करने की कोशिश की। सभी धर्मों के लोगों की आध्यात्मिक और नैतिक उन्नति के लिये प्रयास किया।
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References
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