अनुवाद साहित्य का महत्व

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डॉ. विट्ठलगौडा एम. खानगौडर

Abstract

अनुवाद एक भाषा, संस्कृति और समाज को दूसरे से जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु है। वैश्वीकरण के वर्तमान युग में इसका महत्व बहुआयामी हो गया है। केवल शब्दशः परिवर्तन न होकर, अनुवाद विचारों, भावों और सांस्कृतिक संदर्भों का सूक्ष्म स्थानांतरण है, जो इसे कला और विज्ञान दोनों बनाता है। यह प्रक्रिया ज्ञान-विज्ञान के प्रसार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत जैसे बहुभाषी देश में राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साहित्यिक समृद्धि के साथ-साथ शिक्षा, अनुसंधान, वैश्विक शांति और व्यावसायिक-तकनीकी क्षेत्रों में भी इसका व्यापक उपयोग है। भाषाई और सांस्कृतिक चुनौतियों के बावजूद, अनुवाद विश्व के व्यापक ज्ञान को सुलभ बनाकर संपूर्ण मानवता को एकता के सूत्र में पिरोने का एक अनिवार्य साधन है।

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Author Biography

डॉ. विट्ठलगौडा एम. खानगौडर

सहायक प्राध्यापक, एस. के. कला और एच. एस. के. विज्ञान महाविद्यालय, विद्यानगर, हुबली.

How to Cite

विट्ठलगौडा एम. खानगौडर. (2026). अनुवाद साहित्य का महत्व. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 16(06), 175 to 177. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/2240

References

डॉ. गार्गी गुप्त – अनुवाद सिद्धांत और व्यवहार

डॉ. नगेंद्र – अनुवाद विज्ञान

डॉ. रामविलास शर्मा – भाषा और समाज

डॉ. सुरेश कुमार – अनुवाद के सिद्धांत

भोलानाथ तिवारी – अनुवाद कला

डॉ. गोपीनाथ तिवारी – अनुवाद: सिद्धांत और प्रक्रिया

डॉ. कृष्णकुमार गोस्वामी – अनुवाद अध्ययन