आधुनिक साहित्य में स्त्री विमर्श
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Abstract
आधुनिक साहित्य में स्त्री विमर्श एक महत्वपूर्ण वैचारिक धारा के रूप में उभरा है, जिसने स्त्री के अस्तित्व, अस्मिता, स्वतंत्रता और अधिकारों से जुड़े प्रश्नों को केंद्र में स्थापित किया है। यह शोध-पत्र स्त्री विमर्श की अवधारणा, उसके विकास, प्रमुख हिन्दी लेखिकाओं के योगदान तथा स्त्री जीवन की विविध समस्याओं के साहित्यिक प्रस्तुतीकरण का विश्लेषण करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आधुनिक साहित्य स्त्री को केवल करुणा की प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि संघर्षशील और आत्मनिर्णयी व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करता है।
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References
महादेवी वर्मा – श्रृंखला की कड़ियाँ
मन्नू भंडारी – आपका बंटी
कृष्णा सोबती – मित्रो मरजानी
इस्मत चुगताई – लिहाफ
उषा प्रियंवदा – वापसी
चित्रा मुद्गल – आवां
प्रभा खेतान – अन्या से अनन्या
भीमराव अंबेडकर – भाषण एवं लेख
त्रिवेणी – चयनित उपन्यास
अनुपमा निरंजन – चयनित रचनाएँ
वैदेही – चयनित कहानियाँ