आधुनिक रंगमंच और हिंदी नाट्य साहित्य
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यह शोध पत्र आधुनिक हिंदी रंगमंच और नाट्य साहित्य के विकास और महत्त्व का अन्वेषण करता है। यह आदिकाल से लेकर आधुनिक युग तक नाट्यकला की यात्रा को रेखांकित करता है, जिसमें संस्कृत परंपरा, लोक नाट्य और 19वीं शताब्दी के पुनर्जागरण का प्रभाव शामिल है। इसमें भारतेन्दु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी नाटक का जनक मानते हुए, जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक नाटक और मोहन राकेश के यथार्थवादी एवं अस्तित्ववादी नाटकों के योगदान पर प्रकाश डाला गया है। यह पत्र नाट्य साहित्य को मात्र मनोरंजन न मानकर समाज के दर्पण के रूप में देखता है, जो सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय संघर्षों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। इसमें बाल रंगमंच की भूमिका और भारतीय एवं पश्चिमी नृत्य-नाट्य शैली के अंतर को भी स्पष्ट किया गया है। निष्कर्षतः, आधुनिक नाट्य रंगमंच आत्ममंथन और समाज सुधार की प्रेरणा देता है।
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अंतर्जाल
रंगमंच, बलवंत गार्गी, पु.सं - 212 – 214
रंगमंच पु.सं - 213