आधुनिक हिन्दी उपन्यासों में चित्रित समाज

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वैशाली जाधव

Abstract

समाज विश्व व्यापक है । जहाँ जीवन है वहाँ संबंध है और जहाँ संबंध है वहाँ समाज है। इस अर्थ में प्रत्येक मानव का जीवन सामाजिक जीवन है । इसीलिए समाज को प्राय: मानव संबंधों का जाल कहा गया है । समाज से ही साहित्य का निर्माण होता है । अनेक साहित्यकार जैसे गिरिराज किशोर, विष्णु प्रभाकर, शिवप्रसाद सिंह, भगवतीचरण वर्मा आदि रचनाकार होने के नाते समाज में जो वातावरण फैला है उसका यथार्थ अंकन उन्होंने अपने उपन्यासों के माध्यम से करने का प्रयास किया है । सामूहिक, राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक संवेदनाओं से संबंध है । परिवार, विवाह, पीढ़ीगत संघर्ष,नारी और उससे संबंधीत अनेक सामाजिक समस्याओं का वर्णन अपने उपन्यास में किया है ।

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Author Biography

वैशाली जाधव

अध्यापिका,हिंदी विभाग, के,एल,ई,संस्था बसव प्रभु कोरे कला, विज्ञान तथा वाणिज्य महाविद्यालय,चिक्कोड़ी.

 

How to Cite

वैशाली जाधव. (2025). आधुनिक हिन्दी उपन्यासों में चित्रित समाज. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 8(05), 216 to 221. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/1526

References

समाज शास्त्र के सिद्धांत- विद्याभूषण एवं सचदेव-पृ. सं-68

अरस्तु, पॉलिटिक्स-खंड-3-पृ. सं-26

गिरीराज किशोर-ढाई घर-भरती यज्ञानपीठ प्रकाशन, नई दिल्ली-1991-पृ. सं-249

गिरीराज किशोर-ढाई घर-भरतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन, नई दिल्ली-1991 पृ. सं-154

विष्णु प्रभाकर-संकल्प- वाणी प्रकाशन-1993-पृ. सं-191

शिवप्रसाद सिंह, अलग-अलग वैतरणी- लोक भारती प्रकाशन इलाहाबाद-1968-पृ. सं-252

भगवती चरणवर्मा-भूले बिसरे चित्र-राजकमल प्रकाशन-1959-पृ. सं-185-186