हिंदी लेखिकाओं की कहानी में स्त्री संवेदना
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मैत्रेयी पुष्पा जी की कहानी “फैसला,” कृष्णा सोबती जी की “सिक्का बदल गया,” सुधा अरोड़ा जी की “रहोगी तुम वही,” मालती जोशी जी की “बहुरि अकेला,” मृदुला गर्ग जी की “हरी बिंदी” तथा “मीरा नाची” कहानियों में नारी संवेदनाओं का उल्लेख किस प्रकार से किया गया है। उनमें स्त्री की भावनाओं का बहुत ही सूक्ष्म तथा रोचकता से भरी हुई कहानी हमारे सामने उपलब्ध होती है। “फैसला” कहानी में बासुमति का पात्र चित्रण सजीव हो उठा है। बदलते समाज में स्त्री का स्थान मान बदलते दिखाई देता है, पर है नहीं। पढ़ी-लिखी महिला की सोच भले ही शुरू में हार हो, लेकिन समय के साथ सही फैसला लेती है। पुरुष कितना भी कोशिश करे, सत्य के सामने हार मानने के सिवा कुछ नहीं कर सकता। कई सालों से अपना दबदबा बनाए रखा था। समाज उसका बाल भी बांका नहीं कर सका था, पर उसकी अपनी पत्नी के द्वारा मुँह के बल गिर जाता है। इसे बहुत सुंदर और रोचकता से दिखाया गया है।
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References
कथा सप्तक: -सं: - डॉक्टर मंजुला चौहान. देशमुख अफशा बेगम
समकालीन साहित्य: -सं: - डॉक्टर राजेंद्र पोवार
कथा सप्तक: -पृष्ट. 17
वही -पृष्ट. 23
वही -पृष्ट. 36
वही: -पृष्ट. 30