मीडिया और हिंदी भाषा

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सुनीता रा. हुन्नरगी

Abstract

मानव सभ्यता का चाहे कितना ही वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक विकास क्यों ना हो जाए, उत्तरोत्तर परिवर्तन और विकास के कारण नवोदित भावों, विचारों और संकल्पनाओं के संप्रेषण और विचार-विनिमय का माध्यम भाषा ही रहेगी। हर देश की पहचान वहां बोली जाने वाली भाषा से होती है। भारत में हिंदी भाषा का प्रयोग राजभाषा के साथ-साथ सर्वाधिक बोली जानेवाली और समझी जानेवाली भाषा के रूप में हिंदी भाषा का महत्वपूर्ण स्थान है। भाषा भाव एवं विचारों की अभिव्यक्ति का साधन है। भाषा एक सशक्त माध्यम है जो सूचना एवं ज्ञान को जनों तक पहुंचाता है। भाषा को जनसंवाद के रूप में जोड़ने का काम आज आधुनिक युग में तीव्रता से हो रहा है। आज का युग इलेक्ट्रॉनिक है, इंटरनेट के माध्यम से तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया-रेडियो, मोबाइल, फेसबुक, ट्विटर, ब्लॉग, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, व्हाट्सएप, संगणक आदि। आधुनिक युग में भाषा के इस सामाजिक स्वरूप को और अधिक समृद्ध और व्यापक बनाने में आधुनिक विज्ञान और मीडिया का सर्वाधिक और उल्लेखनीय योगदान है। आज वे आपस में एक दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरा अपूर्ण और अपंग है।

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सुनीता रा. हुन्नरगी

के.एल.ई. संस्था के जी. आय. बागेवाडी कला, विज्ञान और वाणिज्य महाविद्यालय निपाणी

 

How to Cite

सुनीता रा. हुन्नरगी. (2025). मीडिया और हिंदी भाषा. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 8(05), 197 to 205. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/1523

References

हंस- अगस्त- 2001, पृ. सं- 34

ठाकुर दत्त शर्मा आलोक, हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार

व्यवहारिक पत्र लेखन, डॉ. के.पी. शाह मेहता पब्लिशिंग हाउस, सदाशिव पेठ पुणे, पृ.सं- 191

हंस- अगस्त -2001, पृ. सं-34