आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज

Main Article Content

सुलोचना एच. इ.

Abstract

यह आलेख आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज के बीच अटूट संबंध को दर्शाता है, जहाँ साहित्य को समाज का दर्पण और ज्ञान-राशि का संचित कोष माना गया है। भारतेन्दु हरिश्‍चंद्र द्वारा प्रवर्तित आधुनिक काल में, हिंदी ने परिष्कृत रूप लिया और राष्ट्रप्रेम तथा सामाजिक चेतना को मुखर किया। प्रेमचंद जैसे लेखकों ने किसानों और श्रमिकों की सामाजिक समस्याओं का यथार्थ चित्रण किया (जैसे ‘गोदान’), जबकि प्रसाद, निराला और दिनकर जैसे कवियों ने स्वतंत्रता संग्राम में ऊर्जा भरी। आधुनिक साहित्य ने नारी शिक्षा, छुआछूत और अन्य सामाजिक कुरीतियों को चुनौती देकर समाज को न्याय व समानता के लिए विवश किया। वर्तमान में, यह साहित्य डिजिटल माध्यमों से वैश्वीकरण और असमानताओं जैसे समकालीन विषयों पर संवाद कर रहा है। निष्कर्षतः, हिंदी साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम है।

Article Details

Section

Research Articles

Author Biography

सुलोचना एच. इ.

असि. प्रो. एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग, के.एल.इ. संस्था एस. निजलिंगप्पा कॉलेज, राजाजिनगर, बेंगलुरु।

 

How to Cite

सुलोचना एच. इ. (2025). आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज . ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 8(05), 192 to 196. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/1522

References