आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज
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यह आलेख आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज के बीच अटूट संबंध को दर्शाता है, जहाँ साहित्य को समाज का दर्पण और ज्ञान-राशि का संचित कोष माना गया है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा प्रवर्तित आधुनिक काल में, हिंदी ने परिष्कृत रूप लिया और राष्ट्रप्रेम तथा सामाजिक चेतना को मुखर किया। प्रेमचंद जैसे लेखकों ने किसानों और श्रमिकों की सामाजिक समस्याओं का यथार्थ चित्रण किया (जैसे ‘गोदान’), जबकि प्रसाद, निराला और दिनकर जैसे कवियों ने स्वतंत्रता संग्राम में ऊर्जा भरी। आधुनिक साहित्य ने नारी शिक्षा, छुआछूत और अन्य सामाजिक कुरीतियों को चुनौती देकर समाज को न्याय व समानता के लिए विवश किया। वर्तमान में, यह साहित्य डिजिटल माध्यमों से वैश्वीकरण और असमानताओं जैसे समकालीन विषयों पर संवाद कर रहा है। निष्कर्षतः, हिंदी साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम है।
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