वैश्वीकरण और हिंदी साहित्य का विकास

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सागर एस्. गेंड

Abstract

यह शोध-आलेख वैश्वीकरण के युग में हिंदी साहित्य के विकास और उसकी महत्वपूर्ण भूमिका का विश्लेषण करता है। साहित्य को प्राचीनता से आधुनिकता तक संस्कृति और मानव-जीवन को प्रभावित करने वाली एक गतिशील शक्ति के रूप में देखा गया है। वैश्वीकरण ने हिंदी साहित्य को एक नया आयाम दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर इसका विस्तार हुआ है। भारत की ‘अनेकता में एकता’ की संस्कृति की पहचान के रूप में, हिंदी साहित्य ज्ञानपरक और सृजनात्मक माध्यम बना है। आलेख उन कारणों पर प्रकाश डालता है कि कैसे हिंदी भाषा विश्व में तीसरे स्थान पर पहुँचकर, डिजिटल मंचों के उपयोग से व्यापक दर्शकों तक अपनी पहुँच बना रही है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मान्यता, ‘विश्वबंधुत्व’ की भावना को बढ़ावा देने और विचारों के आदान-प्रदान में अनुवाद की अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित किया गया है। निष्कर्ष यह है कि हिंदी साहित्य आज एक ‘विश्व साहित्य’ बनकर उभरा है, जो राष्ट्रीय स्वायत्तता और वैश्विक चेतना दोनों का सूत्रधार है।

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Author Biography

सागर एस्. गेंड

शोधार्थी, हिन्दी विभाग, कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़.

 

How to Cite

सागर एस्. गेंड. (2025). वैश्वीकरण और हिंदी साहित्य का विकास. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 8(05), 171 to 175. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/1518

References

वैश्वीकरण की प्रक्रिया और हिंदी साहित्य : एक समीक्षा

भारतीय साहित्य और अनुवाद

वैश्विक संदर्भ में अनुवाद की भूमिका