आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज
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यह आलेख आधुनिक हिंदी साहित्य (19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से) और समाज के बीच अटूट संबंध का विश्लेषण करता है, जहाँ साहित्य समाज के दर्पण और मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। नवजागरण और राष्ट्रीय चेतना के प्रभाव से जन्मी आधुनिक हिंदी साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ राष्ट्रीयता, सामाजिक सुधार, और यथार्थवादी चित्रण रहीं। प्रेमचंद जैसे साहित्यकारों ने किसानों और दलितों के जीवन को केंद्र में लाकर सामाजिक विषमताओं को उजागर किया। लेख में विशेष रूप से महिला पात्र के बदलते स्वरूप पर जोर दिया गया है, जो पारंपरिक गृहिणी से सशक्त और आत्मनिर्भर व्यक्तित्व में परिवर्तित हुई है। साहित्यकारों ने स्त्री-विमर्श को स्वर दिया, जिससे दहेज और लैंगिक असमानता जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे समाज के सामने आए। निष्कर्षतः, आधुनिक हिंदी साहित्य ने सामाजिक जागृति पैदा करने और एक प्रगतिशील, न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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