आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज
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Abstract
“साहित्य से समाज, समाज से साहित्य” ये दोनों एक-दूसरे से गहरे रूप से जुड़े हुए हैं। साहित्य न केवल समाज की परिस्थितियों को दर्शाता है, बल्कि उसमें परिवर्तन लाने की क्षमता भी रहती है।
“मानव मन की छवि है साहित्य, मानव जीवन की कवि, कला, भाव ही साहित्य, मानव की आशा-आकांक्षा साहित्य, मानव का नित्य रूप साहित्य, मानव को जीने की चाह, जीवन की राह दिखाता है साहित्य।” आधुनिक हिंदी साहित्य ने समाज की चेतना को जगाने का कार्य करते हुए सोच को बदलने और नई विचारधाराओं के साथ विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर प्रश्न उठाने का काम भी किया है।
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References
समकालीन कहानी तथा कविता - डॉ. राजेंद्र पोवार - २०२३ - लोकभारती प्रकाशन, प्रयागराज
डार से बिछुड़ी - कृष्णा सोबती - २०२१ - राजकमल प्रकाशन (पेपरबैक्स), दरियागंज, नई दिल्ली
कथा दर्पण - डॉ. राजेंद्र पोवार - लोकभारती प्रकाशन, प्रयागराज
शशिप्रभा शास्त्री के कथा साहित्य में स्त्री पुरुष संबंध - डॉ. विजयमाला गायकवाड़ - २०२२ - शुभम पब्लिकेशन, कानपुर