आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज

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निकीता लंबुगोळ

Abstract

यह आलेख आधुनिक हिंदी साहित्य और भारतीय समाज के बीच अटूट संबंध का विश्लेषण करता है। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से विकसित यह साहित्य, अंग्रेजी शासन, राष्ट्रीय चेतना के उदय और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आए सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलावों का प्रतिबिंब रहा है। भारतेंदु युग से लेकर समकालीन साहित्य तक, इसने सामाजिक जागरण और सुधार का कार्य किया, जिसमें राष्ट्रवाद, यथार्थवाद (प्रेमचंद), और मानवतावाद को प्रमुखता मिली। साहित्य ने दहेज प्रथा और जातिवाद जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। इसमें स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, और पर्यावरण विमर्श जैसे नए विमर्शों का उदय हुआ। आधुनिक हिंदी साहित्य समाज को एक स्वस्थ और मानवतावादी दृष्टिकोण प्रदान करता रहा है, जो आज भी भारतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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Author Biography

निकीता लंबुगोळ

के.एल.ई. जी. आय. बागेवाडी महाविद्यालय, निपाणी, बेलगावी।

 

How to Cite

निकीता लंबुगोळ. (2025). आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 8(05), 139 to 143. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/1513

References

दृष्टि आईएएस: मध्यकालीन और आधुनिक भारतीय साहित्य