आधुनिक रंगमंच और हिंदी नाट्य साहित्य: मोहन राकेश लिखित “आषाढ़ का एक दिन” - एक मूल्यांकन
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यह शोध-आलेख मोहन राकेश द्वारा रचित “आषाढ़ का एक दिन” (१९५८) का आधुनिक हिंदी नाट्य साहित्य के संदर्भ में मूल्यांकन करता है। यह नाटक भारतीय रंगमंच के ऐतिहासिक विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है और इसे पहला आधुनिक हिंदी नाटक कहा जाता है। आलेख कालिदास और मल्लिका के मार्मिक प्रेम-संबंध तथा कलात्मक सृजन और व्यक्तिगत जीवन के बीच के द्वंद्व को गहराई से दर्शाता है। नाटक में दिखाया गया है कि कालिदास अपनी प्रतिभा और कर्तव्य के लिए प्रेम का त्याग करते हैं, जो एक सच्चे कलाकार की पहचान है। यह मूल्यांकन स्थापित करता है कि यह कृति आधुनिक रंगमंच की संवेदनशीलता और विचारधारा का सशक्त माध्यम बनी।
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आषाढ़ का एक दिन - मोहन राकेश
आषाढ़ का एक दिन - मोहन राकेश
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