साहित्य और शिक्षा में भाषा का महत्व
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Abstract
यह लेख साहित्य और शिक्षा के आधार के रूप में भाषा के केंद्रीय महत्व को रेखांकित करता है। भाषा, मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग करने वाली विशेषता, विचारों और भावनाओं के आदान-प्रदान का सजीव सांस्कृतिक तंत्र है। भारतीय परंपरा में भाषा को “वाक्” (परम शक्ति) माना गया है। साहित्य में भाषा, सौंदर्य, रस, समाज और संस्कृति को अभिव्यक्त कर सामाजिक परिवर्तन का वाहक बनती है। शिक्षा में यह ज्ञान, बौद्धिक विकास और चिंतन का अनिवार्य माध्यम है। मातृभाषा में शिक्षा से आत्मविश्वास और विकास को बल मिलता है। लेख भाषा, साहित्य और शिक्षा के त्रिकोणीय संबंध को स्पष्ट करता है। यह वर्तमान में अंग्रेज़ी के बढ़ते प्रभाव और मातृभाषा की उपेक्षा जैसी चुनौतियों पर प्रकाश डालता है और उनके समाधान के रूप में मातृभाषा को प्राथमिकता देने और डिजिटल माध्यमों से प्रसार का सुझाव देता है, ताकि समाज का बौद्धिक, सांस्कृतिक और नैतिक उत्थान सुनिश्चित हो सके।
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References
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