आधुनिक हिंदी रंगमंच और हिंदी नाट्य साहित्य
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यह आलेख आधुनिक हिंदी रंगमंच और नाट्य साहित्य पर लिखा है। इसमें बताया गया है कि कैसे पारंपरिक नाट्य शैलियाँ जैसे रासलीला और नौटंकी से हटकर, आधुनिक रंगमंच ने पाश्चात्य शैलियों को अपनाया। भारत में आधुनिक रंगमंच की शुरुआत अंग्रेजों के आगमन से हुई, जिन्होंने अपने मनोरंजन के लिए थिएटर स्थापित किए। इस यात्रा में भारतेन्दु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी नाट्य साहित्य का जनक माना जाता है। उनके नाटकों ने नाटक को मनोरंजन से ऊपर उठाकर सामाजिक और राजनीतिक चेतना का माध्यम बनाया। बाद में, मोहन राकेश के नाटकों ने मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद को और धर्मवीर भारती के ‘अंधा युग’ ने काव्यात्मक व प्रतीकात्मकता को मंच पर उतारा। इस तरह, इन नाटककारों ने हिंदी रंगमंच को एक नई पहचान दी और उसे समाज का दर्पण बनाया।
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