भारतीय भाषाएँ और अनुवाद साहित्य (मराठी भाषा के विशेष संदर्भ में)

Main Article Content

हसीना अब्दुलअजीज मालदार

Abstract

भारत एक विशाल बहुभाषी राष्ट्र है। भारत की प्रादेशिकता अलगअलग विशेषता युक्त भूभागों से समृद्ध है। अलगअलग प्रदेशों के होने के बावजूद भी अनेकता में एकता इस देश की प्रमुख विशेषता है। इस विशेषता के पीछे एक विशेष भाव कार्यरत है। यह भाव  प्रेम, सौहार्द, सांस्कृतिक एकता, सद्भाव, सांप्रदायिक ऐक्यत्व, प्रादेशिक अखंडत्व, भाषाई समन्वय आदि दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है। भाषाई एकता एवं समन्वयता को दृढ़ बनाने वाला यह भाव अनुवाद का है। भारत में आज अनेक भाषाएँ एवं बोलियाँ प्रचलित हैं। इन सभी भाषाओं को ’भारतीय भाषाएँ’ नाम से संबोधित किया जाता है। भारतीय भाषाओं में लिखे हुए साहित्य में निहित भाव लगभग एक जैसा ही है। भारत में प्रांत भले ही अलगअलग क्यों न हों लेकिन इन प्रांतों में बसे हुए लोगों की विचारधारा एक ही है। इसी कारण इन प्रांतों में सृजित साहित्य के भाव भी एक ही हैं। इसी भाव के कारण भारत एक ही राष्ट्रीय भावना से बंधित है। भारत की भाषाओं में रचित साहित्य को जब अन्य भाषा में अनूदित किया जाता है, तो हम देख पाते हैं कि स्रोत भाषा के साहित्य की संवेदना लक्ष्यभाषा के साहित्य की संवेदना लगभग एक ही है। अतः प्रस्तुत शोधनिबंध में मराठी भाषा से अनूदित हिंदी साहित्य में भावों और विचारों के ऐक्यत्व के निर्वाह को दर्शाया है।

Article Details

Section

Research Articles

Author Biography

हसीना अब्दुलअजीज मालदार

हिंदी विभाग, डी. आर माने महाविद्यालय, कागल.

How to Cite

हसीना अब्दुलअजीज मालदार. (2025). भारतीय भाषाएँ और अनुवाद साहित्य (मराठी भाषा के विशेष संदर्भ में). ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 8(05), 44 to 49. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/1498

References

भारतीय साहित्य, डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, ज्ञानोदय प्रकाशन; कानपुर, क. फ्लेप से, २००६ पृ. १२

भारतीय साहित्य, डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, ज्ञानोदय प्रकाशन; कानपुर, क. फ्लेप से, २००६

हिंदी भाषा और साहित्य को पुणे का योगदान डॉ. सिराज शेख, आर के पब्लिकेशन मुंबई, पृ. १६४

अनुवाद, संपादक नीना गुप्ता, भारतीय अनुवाद परिषद, नई दिल्ली, २०११