समकालीन भाषा चिंतन में साहित्य, संस्कृति और तंत्रज्ञान की भूमिका
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भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। यह न केवल संचार का साधन है, बल्कि साहित्य और संस्कृति की संवाहक भी है। बदलते समय में तंत्रज्ञान (Technology) ने भाषा के स्वरूप और चिंतन को गहराई से प्रभावित किया है। आज साहित्यिक रचनाएँ डिजिटल मंचों पर जन्म ले रही हैं, सांस्कृतिक संवाद वर्चुअल माध्यमों से हो रहे हैं और भाषा की अभिव्यक्ति नएनए रूपों में सामने आ रही है। इस प्रकार, समकालीन भाषा चिंतन में साहित्य, संस्कृति और तंत्रज्ञान की भूमिका को समझना अत्यंत आवश्यक है। मानव सभ्यता का विकास साहित्य, संस्कृति और तंत्रज्ञान की परस्पर क्रियाओं से संभव हुआ है। जहाँ साहित्य मानवीय भावनाओं और अनुभवों की अभिव्यक्ति है, वहीं संस्कृति जीवनमूल्यों और परंपराओं का दर्पण है। तंत्रज्ञान ने इन दोनों को आधुनिक युग में एक नए आयाम से जोड़ा है। विशेषकर भाषा चिंतन के क्षेत्र में तकनीकी उपकरणों ने अभिव्यक्ति और संप्रेषण के ढंग को बदला है। जबकि बदलते परिवेश में यह आवश्यक भी है।
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References
नामवर सिंह – साहित्य का भविष्य
रामविलास शर्मा – भारतीय संस्कृति और साहित्य
गणेश देवी भारतीय साहित्यिक आलोचना में परंपरा और परिवर्तन
सोशल मीडिया और इन्टरनेट
Marshall McLuhan – Understanding Media: The Extensions of Man