हिन्दी भाषा की मानकता को सिद्ध करनेवाले कारक
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Abstract
हिन्दी भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया और उसे स्थापित करने वाले प्रमुख कारकों का विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें विवेचन किया गया है कि कैसे 'खड़ी बोली' ने ऐतिहासिक विकास, व्याकरणिक स्थिरता और संवैधानिक संरक्षण प्राप्त कर एक मानक भाषा का रूप ग्रहण किया। आलेख में मानकता के अनिवार्य तत्वों-जैसे ऐतिहासिकता, संहिताकरण, जीवंतता और स्वायत्तता - पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी और कामता प्रसाद गुरु जैसे विद्वानों तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय की भूमिका को रेखांकित किया गया है। निष्कर्षतः, यह अध्ययन सिद्ध करता है कि मानकीकरण केवल भाषाई शुद्धि नहीं, बल्कि एक सामाजिक और प्रशासनिक अनिवार्यता है जो हिन्दी को वैश्विक पटल पर प्रतिष्ठित करती है।
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References
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