भारतीय नाटक और लोक-परंपरा - एक विमर्श

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लतीफ़ अहमद बी.
शेख ओवैस बाशा

Abstract

भारतीय संस्कृति की आधारशिला माने जाने वाले लोक नाटकों और शास्त्रीय नाट्य परंपरा के अंतर्संबंधों का विश्लेषणात्मक अध्ययन है। यह आलेख 'नाट्यशास्त्र' के सिद्धांतों से लेकर भारत की विविध क्षेत्रीय विधाओं- जैसे नौटंकी, यक्षगान और बिदेसिया की विकास यात्रा और उनकी विशेषताओं को रेखांकित करता है। शोध में हबीब तनवीर और 'इप्टा' द्वारा लोक तत्वों को आधुनिक रंगमंच से जोड़ने के प्रयासों का मूल्यांकन किया गया है। अंततः, यह अध्ययन भूमंडलीकरण के दौर में लोक-परंपराओं के समक्ष उपस्थित अस्तित्व के संकट और डिजिटल माध्यमों द्वारा उनके संरक्षण की आवश्यकता पर बल देता है, ताकि भारतीय 'लोक मानस' को जीवित रखा जा सके।

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लतीफ़ अहमद बी.

सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कोरमंगला, बेंगलुरु |

शेख ओवैस बाशा

बी.कॉम. (पंचम सेमेस्टर) सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कोरमंगला, बेंगलुरु

References

कपिला वात्स्यायन. पारंपरिक भारतीय रंगमंच.

हबीब तनवीर. लोक रंगमंच और मेरा अनुभव.