संचार-मीडिया और संस्कृति का परस्पर संबंध और परिवर्तन
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समाज की पहचान, चेतना और निरंतरता का आधार संस्कृति है। संस्कृति समाज के सामूहिक अनुभवों का परिणाम होती है। यह व्यक्ति को सामाजिक पहचान प्रदान करती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी मूल्यों का संचार करती है। संस्कृति का महत्व इस बात में निहित है कि यह समाज को दिशा, स्थिरता और निरंतरता प्रदान करती है। यह समाज की जीवन-पद्धति, भाषा, विश्वास, परंपराएँ, कला, साहित्य और नैतिक मूल्यों का समुच्चय है। संस्कृति स्थिर न होकर समय, परिस्थिति और तकनीकी विकास के साथ निरंतर परिवर्तित होती रहती है। इस परिवर्तन में संचार-मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। मानव इतिहास में संचार के साधनों के विकास के साथ-साथ संस्कृति के स्वरूप में भी बदलाव आया है। मौखिक परंपरा से लेकर लिखित ग्रंथों, मुद्रण कला, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया तक, प्रत्येक चरण ने समाज की सांस्कृतिक संरचना को प्रभावित किया है। इक्कीसवीं सदी में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने संस्कृति को न केवल नया मंच दिया है, बल्कि उसे वैश्विक स्तर पर पुनर्परिभाषित भी किया है। मीडिया और संस्कृति के बीच गहरा, गतिशील और द्विदिश (दोनों ओर से प्रभावित करने वाला) संबंध है। मीडिया न केवल संस्कृति को प्रतिबिंबित करता है, बल्कि उसे गढ़ने, रूपांतरित करने और प्रसारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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References
नामवर सिंह - संस्कृति और आलोचना।
रामकुमार वर्मा - संस्कृति और संचार माध्यम, नई दिल्लीः राजकमल प्रकाशन।
समकालीन शोध पत्रिकाएँ एवं ई-जर्नल्स।
मैक्लूहान, मार्शल मीडिया और संचार सिद्धांत।