सिनेमा, नाटक और जनसंस्कृतिः समाज का दर्पण और बदलाव का माध्यम

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लतीफ़ अहमद बी.

Abstract

भारतीय जनसंस्कृति के निर्माण और विकास में सिनेमा तथा नाटक की ऐतिहासिक एवं समकालीन भूमिका का विश्लेषणात्मक अध्ययन यहाँ किया गया है। यह अध्ययन लोक-नाट्य परंपरा और 'इप्टा' (IPTA) के आंदोलनों से लेकर समानांतर सिनेमा और आधुनिक ओटीटी (OTT) प्लेटफार्मों तक की यात्रा को रेखांकित करता है। आलेख में यह विचार किया गया है कि कैसे नाटक ने सामाजिक चेतना की नींव रखी और सिनेमा ने उसे तकनीकी विस्तार दिया। साथ ही, यह भूमंडलीकरण और बाज़ारवाद के दौर में इन माध्यमों के समक्ष उपस्थित चुनौतियों, जैसे- महंगी होती कला और उग्र राष्ट्रवाद का परीक्षण करता है। निष्कर्षतः, सिनेमा और नाटक को केवल मनोरंजन न मानकर, समाज के दर्पण और परिवर्तन के सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित किया गया है।

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Research Articles

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लतीफ़ अहमद बी.

सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कोरमंगला, बेंगलुरु

How to Cite

लतीफ़ अहमद बी. (2026). सिनेमा, नाटक और जनसंस्कृतिः समाज का दर्पण और बदलाव का माध्यम. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 12(03), 218 to 223. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/427

References

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