भारतीय भाषाएँ और राष्ट्रीय एकता
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Abstract
प्रस्तुत शोध आलेख भारत की भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता के बीच के गहरे संबंधों को रेखांकित करता है। लेखिका ने भारत को ‘अनेकता में एकता’ का प्रतीक मानते हुए भाषा को संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की संवाहिका बताया है। आलेख में ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों, विशेषकर ‘आर्य-द्रविड़’ विभाजन और भाषा परिवारों की कृत्रिम अवधारणाओं की आलोचना की गई है। इसमें संस्कृत को भारतीय भाषाओं की जननी और राष्ट्रीय एकीकरण के मूल सूत्र के रूप में स्थापित किया गया है। अंततः, लेख प्रांतीयता और भाषावाद से ऊपर उठकर, हिंदी और प्रादेशिक भाषाओं के समन्वय के माध्यम से राष्ट्रीय अखंडता को सशक्त बनाने पर बल देता है।
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Research Articles

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How to Cite
सुजाता मगदुम. (2026). भारतीय भाषाएँ और राष्ट्रीय एकता. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 12(02), 161 to 165. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/356