भारतीय भाषा परिवार और राष्ट्रीय एकता

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महादेवी गुरव

Abstract

प्रस्तुत शोध आलेख में भारतीय भाषा परिवारों और राष्ट्रीय एकता के अटूट संबंधों का विवेचन किया गया है। लेखिका ने रेखांकित किया है कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन न होकर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की संवाहक है। इसमें हिंदी को संपर्क एवं राजभाषा के रूप में देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है। आलेख में संवैधानिक प्रावधानों, त्रि-भाषा सूत्र, तकनीकी अनुवाद और साहित्य (विशेषकर रामकथा और जयशंकर प्रसाद के साहित्य) की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। निष्कर्षतः, यह लेख सिद्ध करता है कि भारत की ‘अनेकता में एकता’ की अवधारणा को सशक्त बनाने में भाषाई समन्वय और साहित्यिक परंपराओं का योगदान सर्वोपरि है।

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Research Articles

Author Biography

महादेवी गुरव

प्राध्यापक, हिंदी विभाग, के एल ई जी आई बागेवाडी महाविद्यालय, निपाणी, कर्नाटक.

How to Cite

महादेवी गुरव. (2026). भारतीय भाषा परिवार और राष्ट्रीय एकता. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 12(02), 128 to 135. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/351

References

विष्णु पुराण

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

जयशंकर प्रसाद - चंद्रगुप्त

हिंदी साहित्य का इतिहास - आचार्य रामचंद्र शुक्ल

काव्य संचयन - सं. डा. के. सतीश

काव्य वैभव