सेज पर संस्कृत उपन्यास में चित्रित स्त्री

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आशीष

Abstract

मधु काँकरिया कृत 'सेज पर संस्कृत' उपन्यास समाज की उन ग्रंथियों को उजागर करता है, जहाँ स्त्रियाँ संस्कृति और संस्कार के नाम पर उत्पीड़ित एवं प्रताड़ित होती हैं । मातृसत्ता और जैन धर्म के शीर्ष पर बैठी सत्ता के माध्यम से पनपी सामाजिक विकृतियों के कारण एक छोटी लड़की छुटकी का जीवन नारकीय बन जाता है । उपन्यास में स्त्री की शुद्धता को चरित्र का पैमाना बनाने, विवाह की रूढ़िवादी रस्मों और समाज में व्याप्त अपसंस्कृति का तीखा विरोध किया गया है । इसके साथ ही, यह कृति स्त्री अस्मिता, स्वतंत्रता और धर्म के नाम पर फैले अमानवीय आडंबरों के खिलाफ एक मजबूत वैचारिक संघर्ष प्रस्तुत करती है ।

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आशीष

सहायक प्राध्यापक, सेंट क्लारेट महाविद्यालय, बैंगलोर, कर्नाटक

How to Cite

आशीष. (2023). सेज पर संस्कृत उपन्यास में चित्रित स्त्री. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 2(06), 234 to 239. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/163

References

गोविंद चंद्र पांडेय, समसामयिक भारतीय संस्कृति का आधार, संस्कृति की सत्ता (सं. डॉ. दयानिधि मिश्र) पृ. 21

हजारी प्रसाद द्विवेदी, अशोक के फूल, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, तीसवाँ संस्करण 2011, पृ. 67

मधु काँकरिया, सेज पर संस्कृत, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, प्रथम संस्करण 2010 पृ. 56

वही, पृ. 151

वही पृ. 95

वही पृ. 132

वही, पृ. 99