भाषा, साहित्य और संस्कृति का अंतर्संबंध
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Abstract
भाषा, साहित्य और संस्कृति के बीच के गहरे और अन्योन्याश्रित संबंधों का विश्लेषण करता है। अध्ययन यह रेखांकित करता है कि भाषा न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि वह संस्कृति की वाहक और अस्मिता का आधार भी है। साहित्य को समाज का दर्पण मानते हुए, यह पत्र स्पष्ट करता है कि कैसे साहित्यिक कृतियाँ सांस्कृतिक मूल्यों और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करती हैं। शोध में भारतीय संदर्भ, विशेषकर भक्ति आंदोलन और आधुनिक हिंदी साहित्य का उदाहरण देते हुए, वैश्वीकरण और डिजिटल युग में भाषाई विलुप्ति और सांस्कृतिक समरूपीकरण जैसी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है। निष्कर्षतः, मानवीय सभ्यता के संरक्षण के लिए इन तीनों तत्वों का संतुलन अनिवार्य है।
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References
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