भाषा, साहित्य और संस्कृति का अंतर्संबंध

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लतीफ अहमद बी.
तमन्ना एम.

Abstract

भाषा, साहित्य और संस्कृति के बीच के गहरे और अन्योन्याश्रित संबंधों का विश्लेषण करता है। अध्ययन यह रेखांकित करता है कि भाषा न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि वह संस्कृति की वाहक और अस्मिता का आधार भी है। साहित्य को समाज का दर्पण मानते हुए, यह पत्र स्पष्ट करता है कि कैसे साहित्यिक कृतियाँ सांस्कृतिक मूल्यों और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करती हैं। शोध में भारतीय संदर्भ, विशेषकर भक्ति आंदोलन और आधुनिक हिंदी साहित्य का उदाहरण देते हुए, वैश्वीकरण और डिजिटल युग में भाषाई विलुप्ति और सांस्कृतिक समरूपीकरण जैसी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है। निष्कर्षतः, मानवीय सभ्यता के संरक्षण के लिए इन तीनों तत्वों का संतुलन अनिवार्य है।

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Author Biographies

लतीफ अहमद बी.

असिस्टेंट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कोरमंगला, बैंगलोर।  

तमन्ना एम.

छात्रा, बी.ए. द्वितीय सेमेस्टर, सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कोरमंगला, बैंगलोर।

How to Cite

लतीफ अहमद बी., & तमन्ना एम. (2026). भाषा, साहित्य और संस्कृति का अंतर्संबंध. ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA), 12(03), 258 to 264. https://aksharasurya.com/index.php/latest/article/view/433

References

हजारीप्रसाद द्विवेदी, हिंदी साहित्य की भूमिका

रामधारी सिंह दिनकर, संस्कृति के चार अध्याय

एडवर्ड सैपिर, Language: An Introduction to the Study of Speech.

रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास

भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली